एक दशक से ज्यादा समय से बैजनाथ में अपनी खोई हुई जीत को वापस पाने के लिए भाजपा बेशक उत्सुक है। लेकिन इस बार भी यहां भाजपा की राह आसान नजर नहीं आती। पिछले चुनाव में पुर्नसीमांकन के कारण उम्मीदवार से लेकर राजनीतिक हलके की बदली सीमा के कारण यहां भाजपा कई सालों से बैजनाथ की सियासत में छाए किशोरी लाल के सामने नहीं टिक पाई थी। पिछले चार वर्षो पर नजर डाले तो बैजनाथ में भाजपा मजबूत हुई है। लोकसभा चुनाव में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक लीड भाजपा उम्मीदवार को बैजनाथ से ही मिली थी। लेकिन चुनाव नजदीक आते ही भाजपा के लिए यहां वही राह बनना शुरू हो गई है, जिसे वर्ष 2007 में भाजपा यहां झेल चुकी है। यानी सफलता की राह की तरफ बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भाजपा के ही यहां कई गुट तैयार हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दम पर यहां हर कोई भाजपा की टिकट का दावा ठोक रहा है। ताकि मोदी लहर में ही सही उनकी किश्ती इस सफलता को आसानी से पार कर लें। ऐसे में भाजपा भले ही जिसे भी टिकट दें, उसके लिए कांग्रेस से अधिक कांटे बोने के लिए भाजपा के ही लोग तैयार बैठ गए हैं। इसकी शुरूआत अलग अलग ढंग से लोगों को एकत्रित कर बैठकों के जरिए अपना जनाधार साबित करने से भी हो गई है। तो भाजपा के ही कुछ नेता यहां टिकट के दावेदारों को अपने अधीन कर आगे कर इस पूरी पाली को ही अपने पक्ष में करने की फिराक में लग गए है। वर्ष 2007 में भी भाजपा के यहां से उम्मीदवार दूलो राम के गणित को भाजपा के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने बिगाड़ा था। साथ ही उस समय भाजपा के ही कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव संग्राम से पहले ही आम लोगों पर अपनी भविष्य की ताकत की धौंस भी महंगी पड़ गई थी। इस बार कुछ ऐसे ही गणित बनने लगा है। इस चुनाव में भाजपा मंडल का एक पुराना धड़ा भी भाजपा की राह को कठिन बना सकता है। क्योंकि इस धड़े के पदाधिकारियों को जिस ढंग से पार्टी व पदों से रुख्सत किया गया था। वो कहीं न कहीं रंज के रूप में सामने आएगा ही। इस समय भाजपा में उम्मीदवारों की फेहरिस्त भी लंबी हो चली है। इनमें पिछले चुनाव में 16 हजार मत लेकर दूसरे नंबर पर रहे मुल्ख राज प्रेमी प्रबल दावेदार है। तो बीड़ पंचायत से महिला नेत्री एवं महिला आयोग की पूर्व सदस्य शीला देवी भी इस दौड़ में आगे आ गई है। पिछले चुनाव में कांग्रेस से खफा जिला परिषद सदस्य तिलक राज भी इस चुनाव में भाजपा की टिकट के दावेदारों में एक है। तिलक राज ने न केवल भाजपा में पकड़ बनाई है, बल्कि भाजपा से संबंधित कई अन्य संगठनों के कार्यों में भी तिलक आगे हैं। इसके अलावा भी कई नाम आगे आ रहे है। टिकट मिले तब मिले, लेकिन चुनाव से पहले ही इन नेताओं के अलग अलग कार्यक्रम जहां जनता में चर्चा बने हुए है। वहीं, कांग्रेस के मौजूदा विधायक किशोरी लाल अपनी ही चाल से दूसरी पारी की तैयारी में है। 35 साल तक बैजनाथ पंचायत की प्रधानी कर चुके किशोरी लाल वर्ष 2012 में यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। उस समय किशोरी लाल के सामने भी वही चुनौतियां थी, जो भाजपा वर्ष 2007 तथा अब झेलने जा रही है। लेकिन पं संत राम के समय से ही अपनी पकड़ बना चुके तथा बैजनाथ में प्रधान होने के साथ साथ क्षेत्र के सभी लोगों की समस्याओं का यहां के कार्यालयों में समाधान करवाने के कारण बनी अपनी पकड़ से किशोरी लाल ने अपनी नाव पार लगा ली थी। इस बार किशोरी लाल के सामने अभी कोई उम्मीदवार भी उस ढंग से नहीं कूदा है, जिस ढंग से भाजपा में शुरूआत हुई है। ऐसे में भाजपा की आसान होती राह, अब कठिन डगर पर पहुंच गई है। अब बैजनाथ भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं की आपसी सहमति ही इस डगर को आसान बना सकती है। साथ ही चुनाव से पहले अगर छिटक रही भाजपा एक न हुई तो शायद इतिहास फिर वापस आ सकता है और फिर से बैजनाथ कांग्रेस के दुर्ग की ही संज्ञा बरकरार रख सकता है।
प्रकृति की गोद में बसी देवभूमि हिमाचल की खूबसूरती अन्य राज्यों से अलग है। हिमाचल पर प्रकृति ने वो नेमतें बख्शी हैं जो विदेशों में भी नहीं है। तभी तो इस छोटे से प्रदेश में मिनी स्विट्डरलैंड, छोटी काशी, मिनी ल्हासा जैसे कई शहर बसते हैं। इसी वजह से यहां पर्यटन कारोबार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खास बात यह है कि हिमाचल की हर ऋतु में घूमने का लुत्फ लिया जा सकता है। प्रदेश के कई स्थान ऐसे हैं जहां हर मौसम में घूमने की अलग ही अनुभूति होती है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यहां साहसिक खेलों के जरिये भी
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