कुछ दिन पहले छितकुल जाना हुआ। चीन-तिब्बत की सीमा में किन्नौर जिला में सांगला वैली का अंतिम गांव, छितकुल को भारत का आखिरी गांव भी कहा जाता है। क्योंकि इस गांव के आगे केवल अंतराष्ट्रीय सीमा है। यहां के लोग अच्छे ही नहीं बल्कि बहुत अच्छे हैं। अतिथि सत्कार की बात हो या फिर पर्यावरण की यहां के लोग काफी जागरूक है। छितकुल में मुलाकात हुई भाई अरविंद नेगी जी से, हंसमुख प्रतिभा के धनी अरविंद जी छितकुल के उपप्रधान हैं। गांव में पर्यावरण की बात हो या फिर पंचायत में लोगों की समस्या के समाधान की अरविंद जी हमेशा आगे रहने वालों में से एक हैं। बातों बातों में ही पता चला कि अरविंद जी कार्मिक प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं और बीएड भी हैं।
ऐसी दुरुह परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी शिक्षा को पूरा किया और कहीं नौकरी की बजाए अपनी पंचायत अपने गांव में जनसेवा को अपनाया। अरविंद जी वर्ष 2016 से इस पंचायत के उपप्रधान हैं। पंचायत को लेकर बात हुई, तो इतना ही कहा कि छितकुल मेरे लिए कर्मभूमि, जन्मभूमि सब कुछ है। यहां का पर्यावरण अच्छा रहे, गांव के लोगों तक सरकार की योजनाएं पहुंचे। यहां के लोगों को सभी सुविधाएं मिले, इसके लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं। यह सब यहां के गांवों के लोगों व उनके सहयोगियों के कारण ही संभव हो पाता है। गांव में पर्यटक पहुंचते हैं, ऐसे में यहां के कूड़े कचरे का वैज्ञानिक ढंग से निष्पादन हो पाए, इसके लिए भी अरविंद ने हमेशा पहल की है।
प्रकृति की गोद में बसी देवभूमि हिमाचल की खूबसूरती अन्य राज्यों से अलग है। हिमाचल पर प्रकृति ने वो नेमतें बख्शी हैं जो विदेशों में भी नहीं है। तभी तो इस छोटे से प्रदेश में मिनी स्विट्डरलैंड, छोटी काशी, मिनी ल्हासा जैसे कई शहर बसते हैं। इसी वजह से यहां पर्यटन कारोबार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खास बात यह है कि हिमाचल की हर ऋतु में घूमने का लुत्फ लिया जा सकता है। प्रदेश के कई स्थान ऐसे हैं जहां हर मौसम में घूमने की अलग ही अनुभूति होती है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यहां साहसिक खेलों के जरिये भी
Saturday, 19 December 2020
ऐसी तालीम पाई, कर रहे छितकुल की भलाई
बस्पा नदी के किनारे बसी यह खूबसूरत घाटी सभी के लिए स्वर्ग से कम नहीं है। यहां की खूबसूरती सभी लुभाती है। अरविंद कहते हैं कि यहां पर्यटन के क्षेत्र में भी काफी कुछ करना बाकि है। यह गांव एक सुंदर ढंग से विकसित हो, यहां पर्यटन से पंचायत के युवाओं को रोजगार मिले। यही उनका प्रयास है। मुझे अच्छा लगा कि ऐसे अंतिम छोर के गांव में भी ऐसे प्रतिनिधि है, जो अपने गांव अपने लोगों के बारे में सोच रखते हैं, पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ बोलते हैं। सांगला वैली में छितकुल तक काफी लोगों से मुलाकात हुई, यहां के लोग बहुत ही अच्छे हैं। यहां के पंचायत प्रतिनिधि भी एक अच्छी व सकरात्मक सोच रखने वाले हैं। इस घाटी व यहां के लोगों को मेरा नमन।
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